देश में चल रहे कोरोना महासंकट के चलते चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की जीडीपी में 23.9 प्रतिशत की गिरावट आई है। जीडीपी में शामिल किए गए कुल 8 सेक्टर्स में से सिर्फ एग्रीकल्चर ही एक ऐसा सेक्टर है। जहां पर बढ़त देखने को मिली है।

आपको बता दें कि 31 अगस्त को सीएसओ की तरफ से ये आंकड़े जारी किए गए हैं। इस बार जीडीपी की ग्रोथ रेट में गिरावट तमाम अनुमानों से ज्यादा रही है।

दरअसल कोरोना महासंकट के दौरान लगाए गए लॉकडाउन के बाद जीडीपी के आंकड़ों को पहली बार जारी किया गया है। अप्रैल से जून के बीच पूरी तरह से देश में लॉकडाउन था। जिसके चलते देश की आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ गई थीं।

GDP के आंकड़े सामने आने के बाद मोदी सरकार आम जनता के साथ अब विपक्षी नेताओं के निशाने पर चुकी है। सोशल मीडिया पर मोदी सरकार को घेरा जा रहा है।

इसी कड़ी में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने ट्विटर पर लिखा-

वहीं गुजरात के वडगाम विधानसभा क्षेत्र के विधायक और दलित एक्टिविस्ट जिग्नेश मेवानी ने मीडिया पर निशाना साधते हुए लिखा- “मीडिया चैनल के भाऊ-भाऊ करने वाले पत्रकार की नौकरियाँ सुरक्षित है. जिनको नफरत फैलाने के लिए करोड़ों रुपए मिल रहे हैं, उन लोगों को आपकी आर्थिक स्थिति की कोई परवाह नहीं. जीडीपी जितना भी घटे, इनकी नौकरी तो सुरक्षित है. लेकिन क्या आपका खाली पेट नफरती कीड़ों से भरेगा या रोटी-नौकरी से?”

यह कहना गलत नहीं होगा कि मोदी राज में भारत में बेरोजगारी, जीडीपी, गरीबी रेखा, किसान आत्महत्या आदि से जुड़े सभी आंकड़े छुपाए जाते रहे हैं। लेकिन अब सरकार ने कोरोना महा संकट के दौरान यह ऐलान कर दिया है कि भारत की विकास दर 50 साल पीछे चली गई है।

हाल ही में देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कोरोना महा संकट में अर्थव्यवस्था के गिरने को ”एक्ट ऑफ गॉड” करार दिया था। जिसके बाद मोदी सरकार की सोशल मीडिया पर भी काफी किरकिरी हो चुकी है।

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