कोरोनाकाल में आर्थिक गतिविधियों का धीमा पड़ने का असर अब देखा जा रहा है। जिससे अर्थव्यवस्था पूरी तरह चौपट हो गई है। खासकर तब जब कोरोनावायरस के कारण संपूर्ण देश में लॉकडाउन लगाया गया। जिससे संभालना मोदी सरकार के लिए चुनौती बनता जा रहा है। वहीं अर्थव्यवस्था को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है।

जब पूरा विश्व आर्थिक मंदी का सामना कर रहा था, तब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपनी आर्थिक नीतियों से भारत को मजबूती के साथ खड़ा गया था। लेकिन अब जब महामारी के बाद पूरी दुनिया संभल रही है। तो वही मोदी सरकार की नीतियां भारत को मंदी की ओर ले जा रही है।

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि देश की अर्थव्यवस्था की नींव झुकी है। आरबीआई (RBI) के एक अधिकारी ने कहा कि चालू वित्त वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही में देश की जीडीपी (GDP) 1 साल पहले की तुलना में 8.7% घटने का अनुमान है। इस तरह से लगातार दो तिमाहियों में जीडीपी (GDP) घटने के साथ देश पहली बार आर्थिक मंदी में घिरा है।

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आरबीआई के अनुसंधानकर्ता पंकज कुमार के जरिए तैयार की गई अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है, कि भारत तकनीकी रूप से 2020-21 के पहले छमाही में अपने इतिहास में पहली बार आंशिक मंदी में चला गया है। आरबीआई (RBI) के इस रिपोर्ट से साफ है, कि देश की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। इसके बावजूद मोदी सरकार हाथ पर हाथ धड़े बैठी है।

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