एक ओर सरकार लगातार उत्तराखंड के विभिन्न शहरों के नाम बदल रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ गांवों के नाम रहवासियों को पसंद नहीं हैं और वे इसे बदलने की मांग कर रहे हैं। सरकार की ओर से इस संबंध में प्रयास नहीं होने से लोगों में नाराजगी है।
सरकार अब तक हरिद्वार में 10, देहरादून में चार, नैनीताल में दो और ऊधमसिंह नगर में एक समेत कुल 17 स्थानों के नाम बदल चुकी है। गौलापार के जीतपुर गांव के झूठपुर के लोग भी लंबे समय से गांव का नाम बदलने की मांग कर रहे हैं। जीतपुर के झूठपुर में सिख, हिंदू समुदाय के 400 से अधिक लोग रहते हैं। ग्रामीण कई बार हल्द्वानी में आंदोलन कर चुके हैं और प्रतिनिधियों को ज्ञापन भी दे चुके हैं। इसके बाद भी मांग को अनसुना किया जा रहा है। उनका कहना है कि जब कोई व्यक्ति पूछता है कि आप किस गांव या क्षेत्र के हो तो नाम बताने में अजीब लगता है। उनके सरकारी दस्तावेजों में भी वही नाम आता है। जब कोई अधिकारी या व्यक्ति उनके दस्तावेज देखता है तो एक बार लोगों को शक की नजर से देखता है। जीतपुर के झूठपुर के ग्राम पंचायत प्रतिनिधि नीरज रैकवाल, जसविंदर सिंह, पवन दीप संधू, सुखविंदर सिंह का कहना है कि सरकार को उनके गांव का नाम बदलना चाहिए। जल्द वह इस संबंध में कुमाऊं आयुक्त से मुलाकात कर फिर से नाम बदलने की मांग करेंगे।
सात साल पहले चोरगलिया का नाम बदलने की चली थी मुहिम
झूठपुर की तरह ही गौलापार क्षेत्र में चोरगलिया नाम से भी एक बड़ा कस्बा है। करीब सात साल पहले स्थानीय जागरूक लोगों ने चोरगलिया नाम बदलने की मुहिम चलाई। वजह थी विभिन्न शहरों में पढ़ाई या नौकरी करने वाले चोरगलिया के छात्र और युवा। सभी को अपने क्षेत्र का नाम बताने में असहज महसूस होता था। चोरगलिया नाम सुनकर उन्हें अजीब नजर से देखते थे। युवाओं ने नाम बदलने के लिए करीब एक माह तक धरना-प्रदर्शन किया। तत्कालीन सीएम से लेकर आला अधिकारियों ने नाम बदलकर नंधौर वैली रखने के लिए फाइल चलाई लेकिन कुछ लोगों के विरोध के कारण मामला लटक गया।
ग्रामीणों की ओर से नाम बदलने को लेकर कोई भी प्रस्ताव या पत्र नहीं मिला है। ग्रामीणों की ओर से पत्र मिलने पर नाम बदलने को लेकर प्रयास किए जाएंगे। उनकी मांग को शासन तक पहुंचाकर नाम बदलने का प्रयास किया जाएगा। – दीपक रावत, कुमाऊं आयुक्त नैनीताल